रे पथिक पथ पर चला चल, विकट बाधा आएँगी
मन में रख उत्साह, तुझको मंज़िलें मिल जाएँगी
समय थोड़ा कठिन होगा, राह में काँटें मिले
पर हमेशा याद रखना कमल कीचड़ में खिले
ले प्रभु का नाम, अपने धर्म का निर्वाह कर
सतत विपदाओ से लड़कर कर्म की जयकार कर
ज़िंदगी तेरी, की तू है इसका सृजनहार
हठी मन से तू लगा दे, आज इस नौका को पार
ज्यों निशा के बाद हर दम, सूर्य उगता है यहाँ
कर तू नभ में आज बदल बन के भीषण गर्जना
क्या जगत है सोचता, इस से तेरा क्या वास्ता
मार्ग अपना स्वयं चुन, ख़ुद ही बना ले रास्ता
रे पथिक पथ पर चला चल, विकट बाधा आएँगी
मन में रख उत्साह, तुझको मंज़िलें मिल जाएँगी
मन में रख उत्साह, तुझको मंज़िलें मिल जाएँगी
समय थोड़ा कठिन होगा, राह में काँटें मिले
पर हमेशा याद रखना कमल कीचड़ में खिले
ले प्रभु का नाम, अपने धर्म का निर्वाह कर
सतत विपदाओ से लड़कर कर्म की जयकार कर
ज़िंदगी तेरी, की तू है इसका सृजनहार
हठी मन से तू लगा दे, आज इस नौका को पार
ज्यों निशा के बाद हर दम, सूर्य उगता है यहाँ
कर तू नभ में आज बदल बन के भीषण गर्जना
क्या जगत है सोचता, इस से तेरा क्या वास्ता
मार्ग अपना स्वयं चुन, ख़ुद ही बना ले रास्ता
रे पथिक पथ पर चला चल, विकट बाधा आएँगी
मन में रख उत्साह, तुझको मंज़िलें मिल जाएँगी
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