दीदार ने तेरे मुझे, काफिर बना दिया
ताउम्र साथ होता, तो कुछ और बात होती
दो पल के साथ ने तेरे, इंसान बना दिया
ताउम्र साथ होता, तो कुछ और बात होती
तेरे मुस्कुराने से मेरी, अंजुमने खिल उठी
ताउम्र साथ होता, तो कुछ और बात होती
यूं छोड़ कर नहीं कोई, जाता गमों के बीच
ताउम्र साथ होता, तो कुछ और बात होती
यादें तेरी रूहानी, मुझमें बसी हुई
ताउम्र साथ होता, तो कुछ और बात होती
ताउम्र साथ होता, तो कुछ और बात होती
दो पल के साथ ने तेरे, इंसान बना दिया
ताउम्र साथ होता, तो कुछ और बात होती
तेरे मुस्कुराने से मेरी, अंजुमने खिल उठी
ताउम्र साथ होता, तो कुछ और बात होती
यूं छोड़ कर नहीं कोई, जाता गमों के बीच
ताउम्र साथ होता, तो कुछ और बात होती
यादें तेरी रूहानी, मुझमें बसी हुई
ताउम्र साथ होता, तो कुछ और बात होती
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